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सी-सेकà¥à¤¶à¤¨ के तà¥à¤°à¤‚त बाद आहार
सरà¥à¤œà¤°à¥€ के तà¥à¤°à¤‚त à¤à¤• बार जब आंतों की कारà¥à¤¯à¤ªà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ सामानà¥à¤¯ हो जाती है, तो आहार को अरà¥à¤§-ठोस में सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤¾à¤‚तरित कर दिया जाता है। सूजन और अवांछित गैस से बचने के लिà¤, ठोस à¤à¥‹à¤œà¤¨ धीरे-धीरे फिर से शà¥à¤°à¥‚ किया जाता है। इस अवसà¥à¤¥à¤¾ में आहार में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, आयरन और फाइबर को शामिल करना आवशà¥à¤¯à¤• है।
निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण, पà¥à¤°à¤¸à¤µ पूरà¥à¤µ विटामिन और दरà¥à¤¦ की दवाà¤à¤‚ कबà¥à¤œ में योगदान करती हैं, जो पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद आम है। साबà¥à¤¤ अनाज, सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, फल, फलियां और नटà¥à¤¸ के रेशे का सेवन करने से कबà¥à¤œ दूर होती है। नई माताओं को à¤à¥€ परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में गरà¥à¤® पानी या सूप खाना चाहिà¤à¥¤
पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ मांसपेशियों को बनाठरखने और नठऊतकों के विकास को बढ़ावा देने में योगदान देता है। माताà¤à¤‚ अतिरिकà¥à¤¤ वसा की चिंता किठबिना परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ पोषण पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने के लिठदà¥à¤¬à¤²à¥‡ पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ का चयन कर सकती हैं। गà¥à¤°à¥€à¤• योगरà¥à¤Ÿ, टोफू, वà¥à¤¹à¤¾à¤‡à¤Ÿ मीट पोलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€ और अंडे, बीनà¥à¤¸ और दाल सी-सेकà¥à¤¶à¤¨ के बाद आहार के लिठविà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ लीन पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ हैं।
गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाओं को उनकी गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ यातà¥à¤°à¤¾ के दौरान और उसके बाद आयरन की खà¥à¤°à¤¾à¤• पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ की जाती है। पà¥à¤°à¤¸à¤µ के दौरान महिलाओं में काफी मातà¥à¤°à¤¾ में खून की कमी हो जाती है। हरी पतà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, बीनà¥à¤¸ और फलियां जैसे आयरन यà¥à¤•à¥à¤¤ à¤à¥‹à¤œà¤¨ लेने से हीमोगà¥à¤²à¥‹à¤¬à¤¿à¤¨ का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ करने में मदद मिलती है और आयरन की कमी से होने वाले à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ कम हो जाती है।
खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ में शामिल होने के लिà¤---
सी-सेकà¥à¤¶à¤¨ रिकवरी के लिठà¤à¤• ताजे फल, सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और नटà¥à¤¸ से बना घर का बना खाना आदरà¥à¤¶ है। आहार योजनाà¤à¤ पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• माठके लिठविशिषà¥à¤Ÿ होती हैं और उनकी पोषण संबंधी आवशà¥à¤¯à¤•ताओं को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखते हà¥à¤ बनाई जाती हैं।
विटामिन यà¥à¤•à¥à¤¤ à¤à¥‹à¤œà¤¨ कोलेजन के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ को बढ़ावा देकर कà¥à¤·à¤¤à¤¿à¤—à¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ ऊतकों की मरमà¥à¤®à¤¤ में मदद करता है। इनमें उचà¥à¤š सà¥à¤¤à¤° के à¤à¤‚टीऑकà¥à¤¸à¥€à¤¡à¥‡à¤‚ट à¤à¥€ होते हैं। मेथी के पतà¥à¤¤à¥‡, पालक, गाजर, बà¥à¤°à¥‹à¤•ली, à¤à¤µà¥‹à¤•ैडो, संतरा, सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤¬à¥‡à¤°à¥€, तरबूज, पपीता विटामिन के अचà¥à¤›à¥‡ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ हैं। वे पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ में सà¥à¤§à¤¾à¤° करने में à¤à¥€ मदद करते हैं।
कोशिका निरà¥à¤®à¤¾à¤£ को बढ़ावा देने और हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को मजबूत करने के लिठपà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ , खनिज और कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है। कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® के अचà¥à¤›à¥‡ सà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥‹à¤‚ में हरी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, दूध और डेयरी उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦, सोया पेय और फोरà¥à¤Ÿà¤¿à¤«à¤¾à¤‡à¤¡ आटा शामिल हैं। कीवी, अंगूर, केला, बà¥à¤²à¥‚बेरी, चेरी, आम, आड़ू, नाशपाती जैसे फलों में उचà¥à¤š खनिज सामगà¥à¤°à¥€ होती है।
आयरन से à¤à¤°à¤ªà¥‚र à¤à¥‹à¤œà¤¨ पà¥à¤°à¤¸à¤µ के दौरान खोठहà¥à¤ रकà¥à¤¤ को वापस पाने में मदद करता है। सी-सेकà¥à¤¶à¤¨ के बाद आहार में पालक, कà¥à¤µà¤¿à¤¨à¥‹à¤†, चिकन, हैम, टरà¥à¤•ी, सूखे खà¥à¤¬à¤¾à¤¨à¥€, तिल और कदà¥à¤¦à¥‚ के बीज, मूंगफली, à¤à¥à¤¨à¥‡ हà¥à¤ बादाम और सूरजमà¥à¤–ी के बीज शामिल होने चाहिà¤à¥¤
आसानी से पचने योगà¥à¤¯ à¤à¥‹à¤œà¤¨ जैसे दही, पनीर, सूप, शोरबा सà¥à¤¨à¥ˆà¤•िंग के बेहतरीन विकलà¥à¤ªà¥‹à¤‚ में मदद करता है। रागी, जई, हरे चने और दाल जैसे फाइबर यà¥à¤•à¥à¤¤ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ के साथ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ मिलाने से मल तà¥à¤¯à¤¾à¤— में परेशानी होती है और कबà¥à¤œ, अपच, गैस और सूजन दूर रहती है।
†सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली माताओं के लिठडेयरी खाना जरूरी है। मलाई रहित दूध, पनीर और कम वसा वाला दही कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, विटामिन और पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ से à¤à¤°à¤ªà¥‚र होता है। लैकà¥à¤Ÿà¥‹à¤œ असहिषà¥à¤£à¥ महिलाà¤à¤‚ अपनी पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिठबादाम या सोया दूध में से चà¥à¤¨ सकती हैं।
गैलेकà¥à¤Ÿà¤¾à¤—ॉग खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ जैसे लहसà¥à¤¨, सौंफ, तिल, हरी पतà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, तà¥à¤²à¤¸à¥€, सà¥à¤¤à¤¨ के दूध के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ और पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ को बनाठरखने या बढ़ाने में मदद करते हैं, और इसे उदारता से माठके आहार में शामिल किया जाना चाहिà¤à¥¤
पानी और तरल पदारà¥à¤¥ जैसे नारियल का दूध, सà¥à¤®à¥‚दी, छाछ, हरà¥à¤¬à¤² चाय, सूप, कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®-फोरà¥à¤Ÿà¤¿à¤«à¤¾à¤‡à¤¡ पेय और फलों के रस मल तà¥à¤¯à¤¾à¤— को आसान बनाने में मदद कर सकते हैं। ये विकलà¥à¤ª पानी के विकलà¥à¤ª नहीं हैं। माताओं को रोजाना कम से कम 3 लीटर पानी का सेवन करना चाहिà¤à¥¤
†बोनस : सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ को बेहतर बनाने के लिठà¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ मसालों जैसे हिंग, जीरा और अजवाइन को मां के आहार में शामिल किया जा सकता है। जीरा पाचन में मदद करता है और सà¥à¤¤à¤¨ के दूध के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ में सà¥à¤§à¤¾à¤° करता है। हिंग और अजवाइन पेट फूलने को कम करने में मदद करते हैं।
†खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ से बचना चाहिà¤---
†सी-सेकà¥à¤¶à¤¨ के बाद à¤à¤¸à¥‡ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ से बचना चाहिठजो थकान, सà¥à¤¸à¥à¤¤à¥€ और धीमी गति से ठीक होने का कारण बन सकते हैं। सी-सेकà¥à¤¶à¤¨ रिकवरी के बाद के डाइट चारà¥à¤Ÿ में à¤à¤¸à¥€ किसी à¤à¥€ चीज को à¤à¥€ खतà¥à¤® कर देना चाहिठजिसे पचने में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ समय लगता है।
कारà¥à¤¬à¥‹à¤¨à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ पेय, खटà¥à¤Ÿà¥‡ रस, कॉफी, चाय और मसालेदार à¤à¥‹à¤œà¤¨ जैसी चीजों से बचना चाहिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वे सूजन और गैस को बढ़ाते हैं। किणà¥à¤µà¤¿à¤¤ और तला हà¥à¤† à¤à¥‹à¤œà¤¨ नाराज़गी और अपच का कारण बन सकता है। चूंकि माताà¤à¤‚ सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करा रही हैं, à¤à¤¸à¥‡ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ दूध को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकते हैं और नवजात शिशॠमें विकास की समसà¥à¤¯à¤¾ पैदा कर सकते हैं।
चना, उड़द, बेसन, राजमा, बेसन जैसी दालों से बने à¤à¥‹à¤œà¤¨ को पहले दो महीनों के लिठबंद किया जा सकता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वे जठरांतà¥à¤° संबंधी समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं का कारण बनते हैं। इसी तरह आलू, पतà¥à¤¤à¤¾ गोà¤à¥€, पà¥à¤¯à¤¾à¤œ जैसी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को डिलीवरी के बाद पहले 40 दिनों तक खतà¥à¤® किया जा सकता है।
मछली और शंख में पारा की मातà¥à¤°à¤¾ अधिक होती है और ये बचà¥à¤šà¥‡ के लिठहानिकारक होते हैं। माताओं को कोलà¥à¤¡ कट, कचà¥à¤šà¤¾ मांस और कचà¥à¤šà¥€ सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से बचना चाहिà¤à¥¤ इस सà¥à¤¤à¤° पर शराब बिलà¥à¤•à¥à¤² नहीं है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ में हसà¥à¤¤à¤•à¥à¤·à¥‡à¤ª कर सकती है और बचà¥à¤šà¥‡ में विकास संबंधी विसंगतियों का कारण बन सकती है।
पà¥à¤°à¤¸à¤µ से पहले और बाद में à¤à¥‹à¤œà¤¨ में सोडियम की मातà¥à¤°à¤¾ की निगरानी की जानी चाहिà¤à¥¤ जमे हà¥à¤ और डिबà¥à¤¬à¤¾à¤¬à¤‚द à¤à¥‹à¤œà¤¨, बेकिंग पाउडर और सोडा जैसे योजक, सोया, बारबेकà¥à¤¯à¥‚, टेरीयाकी, चीनी à¤à¥‹à¤œà¤¨, नमकीन मछली और संसाधित मांस जैसे सॉस में उचà¥à¤š सोडियम होता है और इसका सीमित अनà¥à¤ªà¤¾à¤¤ में सेवन किया जाना चाहिà¤à¥¤
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